रिजर्व बैंक की गर्दन दबाने के अलावा मोदी सरकार के पास कोई रास्ता नहीं बचा है!

Girish Malviya

हर साल एक सोने का अंडा देने वाली मुर्गी का एक बार गला दबाकर एक साथ ही सारे अंडे निकाल लेने की कोशिश अब केंद्र में बैठी मोदी सरकार करने वाली वाली है. रिजर्व बैंक की गर्दन दबाने के अलावा मोदी सरकार के पास कोई रास्ता नहीं बचा है.

वित्त मंत्रालय को मौजूदा त्योहारी सीजन के बाद नवंबर और दिसंबर में जीएसटी का मासिक संग्रह एक लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद थी लेकिन आप को जानकर आश्चर्य होगा कि नवंबर महीने में केंद्र व राज्य सरकारों को जीएसटी से मात्र 97 हजार करोड़ की कमाई हुई है.

बढ़ते हुए राजकोषीय घाटे को देखते हुए कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्वटीज ने पिछले महीने जब 1 लाख करोड़ से अधिक जीएसटी संग्रह हुआ था, तब यह अनुमान लगाया था- ‘हमारा आकलन है कि वित्त वर्ष 2019 के शेष महीनों में हर महीने 1.24 लाख करोड़ रुपये संग्रह की जरूरत होगी’.

लेकिन इस बार भी अपेक्षा से कम जीएसटी संग्रह हुआ है. इस वित्तवर्ष के सात महीनो में ही देश का राजकोषीय घाटा लक्ष्य से 104 फीसद अधिक हो गया.

राजकोषीय घाटा देश के जीडीपी का तीन प्रतिशत यानी 6.24 लाख करोड़ रुपये तक रखने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अप्रैल से अक्टूबर के बीच 6.49 लाख करोड़ हो गया. यह पिछले साल से भी खराब स्थिति है पिछले वित्त वर्ष में अक्टूबर के अंत तक राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 96.1 प्रतिशत रहा था.

विनिवेश के मोर्चे पर भी सरकार असफल सिद्ध हो रही है. अन्य सभी उपाय भी निष्फल रहे हैं. इसलिए राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने के लिए आरबीआई की आरक्षित निधि में सेंध लगाना ही अंतिम रास्ता बचा हुआ है.

इंदौर निवासी गिरीश मालवीय आर्थिक और राजनीतिक मामलों के जानकार हैं . वे सोशल मीडिया के चर्चित लेखक हैं.

भक्त

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