डैमेज कंट्रोल के लिए राहुल-प्रियंका पहुंचेंगे अमेठी

अजय कुमार, लखनऊ

घोड़ों की रेस में लंगडे़ घोडे़ पर कोई दांव नहीं लगाता है, लेकिन बात जब सियासी ‘रेस’ की होती है तो इसमें ‘रेस’ के शौकीनों द्वारा अपने मजबूत और विपक्ष के ‘लंगड़े घोड़ों’ पर दांव लगाना फायदे का सौदा माना जाता है। आम चुनाव से पूर्व उत्तर प्रदेश की सियासत में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। यूपी के राजनैतिक परिदृश्य पर नजर दौड़ाई जाए तो यहां भारतीय जनता पार्टी की समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन से कांटे की टक्कर होती नजर आ रही है। इस टक्कर में कांग्रेस तीसरा कोण बनना चाहती है।

कांग्रेस को कम से कम यूपी में तो चुनावी रेस का कमजोर/लंगड़ा घोड़ा माना ही जा रहा है। प्रियंका वाड्रा की इंट्री के बाद भी कांग्रेस हवा का रूख ज्यादा अपनी तरफ नहीं मोड़ पाई है, लेकिन भाजपा है कि वह अपने मुकाबले में सपा-बसपा की जगह कांग्रेस को ही खड़ा होता दिखाने की हर संभव कोशिश में लगे हैं। बीजेपी के रणनीतिकारो को लगता है कि पीएम मोदी की लोकप्रियता के सामने राहुल गांधी कमजोर कड़ी साबित हो रहे हैं। इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। इसी लिए कांग्रेस और राहुल गांधी दिल्ली से लेकर अमेठी तक बीजेपी नेताओं के निशाने पर हैं।

राहुल को घेरने के लिए भाजपा नेत्री और मंत्री स्मृति ईरानी तो 2014 से ही अमेठी में मेहनत कर रही हैं। इसी मेहनत के बल पर स्मृति पिछले लोकसभा चुनाव में अमेठी में राहुल के सामने मिली अपनी हार को जीत में बदलने का तानाबाना बुन रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर बीजेपी के तमाम नेता अमेठी को लेकर संवेदनशील रहते हैं। सबका यहां आना-जाना लगा रहा है। यहां तक तो सब ठीक था लेकिन जैसे ही पीएम मोदी का 03 मार्च को यहां आने का कार्यक्रम बना कांग्रेस की नींद उड़ गई।

कांग्रेस को जैसे ही इस बात का अहसास हुआ कि राहुल गांधी बीजेपी के चक्रव्यूह में फंस सकते हैं तो उसने भी चुनावी रणभेरी बजने से पहले अमेठी के कील-कांटे मजबूत करने का काम शुरू कर दिया है। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन मार्च को होने वाली रैली के तुरंत बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का भी अमेठी आगमन का प्रोग्राम बन गया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी और कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव बनने के बाद पहली बार प्रियंका गांधी वाड्रा का अमेठी आगमन होगा। कांग्रेस ने इसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं।

दरअसल, कांग्रेस के रणनीतिकारों को इस बात का अच्छी तरह से अहसास हो गया है कि मोदी व भाजपा अमेठी के रास्ते कांग्रेस पर सियासी बढ़त हासिल करने का ताना-बाना बुन रहा है। बीजेपी की इसी रणनीतिक काट के लिए कांग्रेस अमेठी को फिर से मथेगी। कांगेस को लगता है कि अगर समय रहते अमेठी से प्रधानमंत्री और बीजेपी को करारा जबाब नहीं दिया गया तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र की समस्याओं को भाजपा पूरे देश में हवा देने की कोशिश करेगी। ऐसा बीजेपी गुजरात विधान सभा चुनाव में कर भी चुकी है। उस समय राहुल को घेरने के लिए गुजरात में अमेठी की दुर्दशा की चर्चा खूब हुई थी।

कांग्रेस चाहती है कि यह इतिहास दोबारा न दोहराया जाए। उम्मीद है कि तीन मार्च के बाद 07 मार्च तक किसी भी दिन राहुल-प्रियंका अमेठी आकर यहां की जनता से अपने भावनात्मक रिश्तों की डोर मजबूत करने की कोशिश करते नजर आ सकते हैं। अमेठी संसदीय क्षेत्र में करीब एक दर्जन स्थानों पर राहुल-प्रियंका के कार्यक्रम और नुक्कड़ सभाएं हो सकती हैं। राहुल-प्रियंका के दौरे के दौरान कांग्रेस का पूरा फोकस किसानों के साथ युवाओं व महिलाओं पर होगा।

उधर, मिशन अमेठी पूरा करने और तीन मार्च को प्रस्तावित प्रधानमंत्री मोदी की रैली को सफल बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर तमाम नेतागण एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी आदर्श आचार संहिता की सुगबुगाहट और पुलवामा में मारे गए जाबांज सैनिकों की मौत का बदला लेने के बाद चुनावी अभियान की शुरुआत में अमेठी आ रहे हैं। पीएम की रैली सफल हो इसके लिए योगी सरकार भी जुटी हुई है।

28 फरवरी को सीएम अपने तीन अन्य मंत्रियों के साथ अमेठी पहुंचे। योगी ने पीएम के कार्यक्रम स्थल की व्यवस्थाओं को दुरूस्त रखने के साथ ही रैली में होने वाली हर छोटी बड़ी चीज का बारीकी से मंथन किया। योगी के दौरे की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने दौरे के दौरान प्रशासनिक अमले से ज्यादा बातचीत नहीं की। उनका पूरा फोकस संगठन पर था अपेक्षा यही थी कि किस तरह रैली को यादगार बनाया जाय। मुख्यमंत्री ने यह कहने में भी गुरेज नहीं किया कि वर्ष 1998 से हमने अमेठी नहीं जीती है। यदि इस बार सभी कार्यकर्ता जी जान से जुट जाएं तो यह क्रम टूट जाए। गौरतलब हो 1998 में यहां से बीजेपी के टिकट से कांग्रेस से आए संजय सिंह चुनाव जीते थे, लेकिन अब वह फिर कांग्रेस में हैं।

लब्बोलुआब यह है कि जहां भाजपा, राहुल गांधी और कांग्रेस को उसके गढ़ अमेठी में पटकनी देने के लिए उतावली नजर आ रही है। वहीं कांग्रेसी भी आसानी से हथियार डालते नहीं नजर आ रहे हैं। इसीलिए तीन मार्च को मोदी की रैली के बाद दो-चार दिनों के भीतर किसी भी दिन राहुल-प्रियंका के अमेठी आगमन को लेकर खूब चर्चा हो रही है। राहुल-प्रियंका के संभावित अमेठी आगमन को सियासी पंडित डैमेज कंट्रोल के रूप में देख रहे हैं।

लेखक अजय कुमार यूपी के वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं.

भक्त

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