चीन आज भी उनके फेसबुक पर बरबाद पड़ा हुआ है

जिम्‍मेदार होना कभी भी बच्‍चों का खेल नहीं होता. और जिम्‍मेदारी लेना तो शायद सबसे ज्‍यादा मुश्किल काम होता है, और हिम्‍मत का भी, लेकिन इस मामले में यह देश सौभाग्‍यशाली है कि जिम्‍मेदार होने के साथ जिम्‍मेदारी लेने वालों की कमी नहीं है. पहले लोग काम करते थे, लेकिन जिम्‍मेदारी नहीं लेते थे. नेहरूजी, शास्‍त्रीजी, इंदिराजी ने कई बड़े-छोटे काम किये. गुजराल सर, देवगौड़ा अंकल के साथ मनमोहन सर ने भी कभी ना कभी कुछ ना कुछ तो किया ही होगा, लेकिन कभी जिम्‍मेदारी नहीं ली. मेरे ज्ञान का इतिहास बताता है कि जिम्‍मेदारी लेने की विधिवत शुरुआत मोदी सर ने की.

चंद्रयान से लेकर मंगलयान तक, चाय से लेकर गाय तक, दंगा से लेकर गंगा तक, सबकी जिम्‍मेदारी मोदी सर ने ली. और आज तक उस जिम्‍मेदारी को बिना थके ढोते आ रहे हैं. गंगा की सफाई भी शायद इसीलिये नहीं हो पाई कि यह काम पूरा होते ही उनकी जिम्‍मेदारी खत्‍म हो जाती. और जिम्‍मेदार आदमी के पास से जिम्‍मेदारी खत्‍म हो जाये तो फिर कैसे बर्दाश्‍त कर सकता है, यह जीते जी मौत के समान होता है! और जिम्‍मेदार आदमी भला मरना क्‍यों चाहेगा? हमारी ऐतिहासिक जानकारी में इसके पहले आज तक कम से कम कोई राजनेता इतना जिम्‍मेदार कभी नहीं हुआ! उन्‍होंने विकास और रोजगार की जिम्‍मेदारी ले रखी है, और अपनी यह जिम्‍मेदारी वह कभी खत्‍म नहीं होने देंगे ऐसा विश्‍वास है मुझे!

जिम्‍मेदार तो खैर हम भी हुआ करते थे, लेकिन जिम्‍मेदारी कभी ली नहीं. पापा के पाकेट से सवा ग्‍यारह रुपये चोरी हुए, गिन के रखते थे लिहाजा जिम्‍मेदारी तय होनी जरूरी थी. इतिहास गवाह है कि सवा ग्‍यारह रुपये की जिम्‍मेदारी देने के लिए मुझे लिये जमीन पर लोटा-लोटा के जमकर सूता, मेरे शरीर का पूरा भूगोल बदल दिया, लेकिन हम ठहरे गैरजिम्‍मेदार तो थूथून कूंचे जाने के बावजूद जिम्‍मेदारी नहीं ली, तो नहीं ली. पर शुक्‍लाजी ने मेरी ऐतिहासिक जानकारी पर सवाल उठाते हुए जिस कदर बेइज्‍जत किया है, उससे दिल इतना सदमें में है. मन कर रहा है कि झोला उठाकर फकीर बन जाऊं. और हिमालय की ओर निकल जाऊं.

शुक्‍लाजी का कहना है कि मोदीजी से भी बहुत पहले से जिम्‍मेदारी लेने का विश्‍व रिकार्ड शर्माजी के नाम है. शर्माजी जो जिम्‍मेदारी ले सकते हैं, उसे और कोई नहीं ले सकता. शर्माजी मोदीजी से भी ज्‍यादा जिम्‍मेदार हैं. शुक्‍ला जी का कहना है कि शर्माजी जितनी जिम्‍मेदारी अकेले ले लेते हैं, उतनी जिम्‍मेदारी तो अल-कायदा, हिजबुल-मुजाहीदीन और लश्‍कर-ए-तोयबा वाले मिलकर भी नहीं ले सकते. अल-कायदा, हिजबुल और लश्‍कर तो केवल बम विस्‍फोट और आतंकी हमले की जिम्‍मेदारी लेते हैं, अपने शर्माजी तो किसी भी बात की जिम्‍मेदारी ले सकते हैं.

शुक्‍लाजी बताते हैं कि एक बार शर्माजी को किसी कारणवश जिम्‍मेदारी नहीं मिल पाई. शर्माजी ने गुस्‍से में खुद ही चीन को बरबाद करने की जिम्‍मेदारी उठा ली. लोगों ने बहुत समझाया, चीन की तरफ से भी तीन-चार लोग इस जिम्‍मेदारी को छोड़ने को गुहार लेकर आए, लेकिन शर्माजी कतई नहीं पिघले, यह बात खुद शर्माजी ने अपने फेसबुक पर बताई थी. शर्माजी ने चीनियों से कह दिया कि जब वह एक बार जिम्‍मेदारी लेने का कमिटमेंट कर लेते हैं तो वह खुद की तो छोडि़ये सलमान खान की भी नहीं सुनते. उन्‍हें मनाने आये चीनी डर के मारे उनके घर से भाग निकले. फिर अपने फेसबुक एकाउंट पर शर्माजी ने चीन को बरबाद करके रख दिया. चीन आज भी उनके फेसबुक पर जहां-तहां बरबाद पड़ा हुआ है.

शुक्‍लाजी ने मेरी ऐतिहासिक जानकारी का भूगोल बिगाड़ते हुए आगे बताया कि जिम्‍मेदारी की खोज शर्माजी ने ही की थी. एक बार भिखारी संघ वालों ने शर्माजी को संरक्षक की जिम्‍मेदारी दे दी तो उन्‍होंने अपने फेसबुक पर लिखा, ”पहले से ही जिम्‍मे‍दारियां कम थीं क्‍या? तीन-तीन अखबार, न्‍यूज चैनलों में किराये पर मेहमानबाजी. अपना खुद का फेसबुक. सरकार पहले से ही इससे हिल रही थी, लेकिन यादवजी ने जबरिया दूधसंघ का आजीवन रक्षक की जिम्‍मेदारी दे दी. सिंह साहब ने मना करने के बावजूद बारह बोर कट्टा संघ का प्रभारी बना दिया. श्रीवास्‍तवजी के मूली उखाड़ संघ के आरक्षक की जिम्‍मेदारी ठीक से संभाल भी नहीं पा रहा था कि भिखारी संघ ने संरक्षक बना दिया. आखिर लोग मुझसे इतना प्‍यार क्‍यों करते हैं!”

खैर, शर्माजी की जिम्‍मेदारी लेने की ख्‍याति सुन भोजपुरी वाले भी उनके दरवाजे पर पहुंच गये. दरवाजे पर ही जिम्‍मेदारियों की सूची प्‍लेट देखकर भोजपुरी वालों ने शर्माजी का बहुत गुणगान किया, उन्‍हें मसीहा तक बता दिया, ऐसा शर्माजी ने अपने फेसबुक पोस्‍ट में लिखा. भोजपुरी वालों ने शर्मा जी को भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की जिम्‍मेदारी सौंप दी. जिम्‍मेदार शर्माजी ताव में आ गये. घर से ही माइक-बैटरी और कैमरा लेकर जंतर-मंतर पहुंच गए. जमकर भाषण पेले और अनुसू‍ची वाले किताब में अपने हाथ से लिखकर ही भोजपुरी को शामिल कराने लगे. माहौल बनने लगा. अनुसूची में शामिल होने की संभावना देख भोजपुरी वाले बवाल मचाकर, आदतन खिसक लिये.

बताते हैं मौके पर जिम्‍मेदार शर्माजी पाये गए. उनके फोटोग्राफर के अलावा मौका-ए-वारदात पर कोई और बचा नहीं. पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. शर्माजी जमकर पेले गए, लेकिन मात्र छह इंच के अंतर से लाला लाजपतराय बनने से दूर रह गये. अरे भाई, लाठी शर्माजी के तशरीफ के अलावा गर्दन पर भी तो लगी थी ना? लाठीचार्ज में धुनाई के बावजूद शर्माजी जिम्‍मेदारी छोड़े बगैर मौके से भाग निकले. वह तब से रोज इंडिया टीवी, जी न्‍यूज, आजतक देखने में बिजी हैं, उन्‍हें इंतजार है कि कोई तो उन पर हुए लाठीचार्ज की जिम्‍मेदारी ले, लेकिन चैनल सब डिबेट में पाकिस्‍तान को बरबाद करने में जुटे हुए हैं. शुक्‍लाजी बताते हैं कि शर्माजी ने फेसबुक पर कसम खा ली है कि गैरजिम्‍मेदार देश को जिम्‍मेदार बनाकर छोड़ेंगे. अमेरिका को जिला और चीन को ब्‍लॉक बनाने की चेतावनी के बाद उनका फेसबुक बंद हैं. विजय भइया बता रहे हैं कि अमेरिका और चीन को आशंका है कि यह तूफान के पहले वाली शांति है.

इस व्यंग्य के लेखक अनिल सिंह दिल्ली में लंबे समय तक टीवी और वेब पत्रकारिता करने के बाद इन दिनों लखनऊ में ‘दृष्टांत’ मैग्जीन में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. उनसे संपर्क 09451587800 या [email protected] के जरिए कर सकते हैं.

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