पूर्व मुख्यमंत्रियों की बंगलाखोरी पर जस्टिस शर्मा ने कमलनाथ और शिवराज को आड़े हाथों लिया!

श्रीप्रकाश दीक्षित

दिल्ली हाईकोर्ट की रिटायर्ड न्यायाधीश जस्टिस रेखा शर्मा एक लेख में अपनी बात यह कहते हुए समाप्त करती हैं की खुद के वेतन-भत्तों, साधन-सुविधाओं और विशेषाधिकारों की बात सामने आती है तब सारे के सारे नेता और राजनैतिक पार्टियाँ अपने मतभेद और कड़वाहट को भुला कर एकजुट हो जाती हैं.उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस में दो दिन पहले छपे लेख में मुख्यमंत्री बनते कमलनाथ द्वारा शिवराजसिंह चौहान और दिग्विजयसिंह को सरकारी बंगले एलाट करने पर जम कर प्रहार किए हैं. यूपी की याचिका पर सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद शिवराज सरकार द्वारा विधानसभा में पारित कानून हाईकोर्ट द्वारा रद्द करने की लेख में विस्तार से चर्चा है.

जस्टिस शर्मा ने डिस्क्रेश्नरी पावर की आड़ में वही बंगले पूर्वो को फिर एलाट करने के लिए शिवराज की भी खूब खिंचाई की है.वे लिखती हैं की डिस्क्रेश्नरी पावर असाधारण परिस्थितियों में उपयोग के लिए हैं.इसलिए सत्ता से बेदखल नेताओं की सुविधाओं के लिए इनका दुरूपयोग नहीं होना चाहिए.जानना दिलचस्प होगा की अदालती फैसले बाद यूपी में अखिलेश ने क़ानून बनवाया तो सुप्रीम कोर्ट ने उसे भी रद्द कर दिया था.तब मुख्यमंत्री बन चुके आदित्यनाथ ने राजनाथसिंह,कल्याणसिंह, मुलायमसिंह और मायावती जैसे कद्दावर नेताओं से बंगले खाली करवा लिए थे.

इसके बरअक्स शिवराज टालमटोल और लीपापोती करते रहे और कैलाश जोशी, उमा भारती,गौर और दिग्विजयसिंह बंगलों में बने रहे.दरअसल वे खुद तेरह साल तक विशाल मुख्यमंत्री बंगले के साथ डी टाइप कार्यकाल के अंतिम दिनों में बंगले पर भी कब्ज़ा जमाए रहे और फ़िलहाल उसी में रह रहे हैं.जाते जाते यह बंगला वे अपनी किरार जाति के राष्ट्रीय अध्यक्ष को एलाट कर गए हैं.इस पद को उनकी पत्नी साधनासिंह ही सुशोभित कर रही हैं.नए मुख्यमंत्री कमलनाथ भी उन्हीं के पदचिन्हों पर चल रहे हैं. वैसे यह जानना भी दिलचस्प होगा की जब कमलनाथ केंद्र में मंत्री थे तब शिवराज ने उन्हें अपने बंगले के नजदीक बंगला एलाट किया था जबकि वे भोपाल आते ही नहीं थे और दिल्ली से छिंदवाड़ा तक सिमटे हुए थे.

लेखक श्रीप्रकाश दीक्षित भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

भक्त

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