यूपी में अब दंगाई भीड़ को भी मुआवजा!

अंबरीश कुमार

लखनऊ : अब यूपी में दंगाई भीड़ को भी मुआवजा देने की शुरुआत हो गई है. यह भाजपा की सुशासन वाली सरकार का काम है. उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में सांप्रदायिक भीड़ एक पुलिस अफसर की हत्या कर देती है. हत्या में जो नामजद होते हैं वे संघ परिवार से जुड़े बजरंग दल के लोग हैं. भीड़ ने किस तरह हत्या की, यह वीडियो भी वायरल होता है.

सभी हत्यारों के नाम पता भी पुलिस के पास है. पर इस घटना के बाद सूबे के मुख्यमंत्री पुलिस अफसरों के साथ जो बैठक करते हैं, लगता है बजरंग दल ने बुलाई है. पुलिस अफसर की हत्या हुई और बैठक की सरकारी प्रेस रिलीज पूरी तरह बजरंग दल को समर्पित नजर आई. पुलिस अफसर की हत्या पर दो शब्द नहीं और गाय के नाम पर हत्यारी भीड़ का नेतृत्व कर रहे को मुआवजा.

यह किस तरह का सुशासन उत्तर प्रदेश में भाजपा ला रही है. भाजपा के और भी मुख्यमंत्री हुए हैं. कल्याण सिंह से लेकर राजनाथ सिंह तक. कभी पुलिस अफसर पर हमला करने वाले के सामने कोई सरकार इस तरह नतमस्तक नहीं हुई है. एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर ने मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के दौर की एक घटना का हवाला देते हुए लिखा है कि कैसे उन्हें मुख्यमंत्री ने पार्टी के करीबी बदमाश पर कार्यवाई की पूरी छूट दी. एक सरकार यह है जिसने दंगाई भीड़ को भी मुआवजा दे दिया है. यह एक ऐतिहासिक घटना है. इसका असर दूरगामी पड़ेगा. इस घटना से भाजपा के सुशासन के दावे की धज्जियां उड़ गई हैं.

शहरी मध्य वर्ग भाजपा का समर्थन तो करता है पर बवाल फसाद के साथ नहीं खड़ा होता. मुलायम सिंह यादव से शहरी मध्य वर्ग की बड़ी खुन्नस उनके लाठी वाले समर्थकों से थी. वे आज भी मुलायम सिंह वाली समाजवादी पार्टी को गुंडों की ही पार्टी मानते हैं. वीपी सिंह ने जब दादरी को लेकर अभियान छेड़ा तो किसान उत्पीड़न के साथ मुलायम सिंह यादव की इसी लाठी वाली छवि को मध्य वर्ग के बीच पहुंचा दिया.

राज बब्बर ने देवरिया से दादरी तक की जो यात्रा कुशीनगर से शुरू की उस सभा का मुख्य नारा था, जिस गाड़ी पर सपा का झंडा, उस गाड़ी में बैठा गुंडा. यह वही दौर था जब एक लोहिया के नाती ने कैसरबाग में पुलिस इन्स्पेक्टर को बोनट पर टांग कर घुमाया था. ऐसी ही बहुत सी घटनाएं हुईं और मुलायम सिंह सत्ता से बेदखल हो गए.

शहरी मध्य वर्ग का बड़ा हिस्सा भाजपाई हो गया है पर कभी अपने बेटे बेटी को हुडदंगी या बजरंगी नहीं बनाना चाहता. वह तो खुद के लिए एक सुरक्षित समाज चाहता है. वह अयोध्या में मंदिर चाहता था और वोट भी दिया. पर दंगा फसाद नहीं चाहता.

मुझे याद है यूपी विधान सभा का दो हजार बारह का चुनाव प्रचार जब अखिलेश यादव आगे बढ़ रहे थे और मीडिया उन्हें ख़बरों से बाहर किये था. एक वरिष्ठ पत्रकार ने तब कहा था, अब भाजपाई चाहे जो कटवा दे, ये इस बार सत्ता से बहुत दूर हैं. साफ़ कहना था कि मवेशी कटवाने से हर बार सरकार बना लें, यह संभव नहीं है.

बुलंदशहर में जो हुआ उसकी खोजबीन अभी हो रही है. पर यह साफ़ है कि साजिश दंगा कराने की थी. वह नाकाम रही. इस घटना से बड़ा हिंदू समाज भी डर गया है. ये किस भीड़ का समर्थन किया जा रहा है जो एक हिंदू पुलिस अफसर को दौड़ा का मार डालती है. आप इस दंगाई भीड़ के साथ खड़े हो गए हैं. उन्हें मुआवजा दे रहे हैं. क्या उस पुलिस अफसर की बीबी, बहन और बेटे की बात सुनी. सुन लीजिये यह भी एक हिंदू परिवार की आवाज है.

लेखक अंबरीश कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और जनसत्ता अखबार के लंबे समय तक यूपी ब्यूरो चीफ रहे हैं.

भक्त

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