प्रधानसेवकजी को अंधेरभक्त चेखुर प्रसाद की चिट्ठी

आदरणीय प्रधानमंत्रीजी
गोड़ छू के पल्‍लगी

प्रधान सेवकजी, बहुत दिन बाद आपको पत्र लिख पा रहा हूं. पर-परिवार और रोजी-रोजगार में बिजी हो गया था तो पत्र लिखने का टाइमे नहीं मिला. उम्‍मीद है कि आप कुशल एवं प्रसन्‍न होंगे. रामू धोबी भी चौबीस घंटे लगकर आपके कपड़े ठीक से धोता और प्रेस करता होगा, बिना आराम किए. आप देश और राष्‍ट्रवाद के लिये इतना मेहनत कर रहे हैं तो रामू का भी फर्ज बनता है कि दिन में दस बार कपड़े बदलने वाले एक फकीर आदमी के समूचे कपड़े दिन-रात धोता रहे, प्रेस करता रहे.

उम्‍मीद है महेश फोटोग्राफर भी हर मौके का फोटो हींच ही लेता होगा. और तस्‍वीरें छप भी जाती होंगी. पूरा विश्‍वास है कि कोई आपके और फोटो के बीच में आता होगा तो उसे आप सलीके से हटा देते होंगे. उम्‍मीद यह भी है कि अब तक देश भी आगे बढ़ ही चुका होगा, डिजिटल इंडिया में सबके पास रोजी-रोजगार हो चुका होगा. सब काला धन भी वापस लौट आया होगा. स्‍मार्ट सिटी की शान विदेशों में फैल रही होगी.

संभावना है कि आपके प्रयास से रेलवे का कायाकल्‍प हो चुका होगा. दिल्‍ली में बैठी कमजोर सरकार वाली परेशानी भी खत्‍म हो चुकी होगी, पाकिस्‍तानी सैनिक अब डरे-सहमे अपने बिल में छुपे होंगे. हमारी अर्थव्‍यवस्‍था चीन से बड़ी हो गई होगी. जनता को नोटबंदी के पचास दिन बाद एक नया और डिजिटल इंडिया मिल गया होगा. साठ साल में जो नहीं हो पाया होगा, उम्‍मीद है कि वह साठ महीने में आप पूरा करने के कगार पर पहुंच ही गए होंगे.

प्रधान सेवकजी, आपको बताना भूल गया था कि नोटबंदी के बाद थोड़ी परेशानी होने के चलते मैं मनमोहन सिंह के भारत में लौट गया था. सोचा था जब अच्‍छे दिन आने वाले होंगे तब नए भारत में सपरिवार चलूंगा. नौकरी की तलाश में बहुत टाइम निकल गया, मनमोहन सिंह के भारत में तो बहुते बुरा हाल है रोजी-रोजगार का. गैस सिलेंडर भी 5 सौ रुपए से ज्‍यादा है, उम्‍मीद करता हूं कि डिजिटल भारत में इसके दाम आपने बहुते कम कर दिए होंगे.

प्रधान सेवक जी नोटबंदी के दौरान सुना था कि पचास दिन में आप नया भारत देने वाले हैं. उम्‍मीद है कि लोगों को नया भारत मिल चुका होगा. मनमोहन के भारत में तो पेट्रोल बहुत महंगा है महराज, यहां बहाना कर रहे हैं कि क्रूड आयल महंगा है. ई ससुर लोग गरीबों की सेवा करने में आप से टक्‍कर ले भी नहीं सकते, आपके नए भारत में तो पेट्रोल सस्‍ता ही होगा. राष्‍ट्रवादी सरकार की तो यह नैतिक जिम्‍मेदारी है ही.

सेवक जी आप तो गरीबों के अलावा किसी के बारे में सोचते भी नहीं हैं, तो पक्‍का विश्‍वास है कि आपके नये भारत में गैस और तेल के दाम इतने कम हो चुके होंगे कि सौ-दो सौ रुपए में लोगों का महीना निकल जाता होगा. आप तो विदेश यात्रा पर जाते समय जहाज में भी बैठकर केवल गरीबों के बारे में ही सोचते होंगे, ऐसा हमरे छोरे का विश्‍वास है. और मुझे पूरी ‘आशंका’ है कि आप हमरे छोरे का विश्‍वास कभी टूटने नहीं देंगे.

प्रधान सेवकजी, मेरा तो बहुत मन करता है कि आपके बनाए सौ स्‍मार्ट सिटी में तफरी करने और घूमने आउं, मेक-इन-इंडिया देखने आऊ, ले‍किन कांग्रेस के दौर के प्राइमरी स्‍कूल में पढ़ने के चलते हमारा हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास बहुत कमजोर है. कई बार कम्‍पलान पीकर इन विषयों को समझने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाया. शुक्‍लाजी ने इतिहास के चक्‍कर में बीसों बार मेरा भूगोल बिगाड़ा, लेकिन हम फेले रहे.

गणित तो ससुरी आज तक नहीं समझ आई. रिश्‍तों में कभी गणित लगाया ही नहीं. आप तो खैर गणित के मास्‍टर आदमी हैं. आपकी गणित इतनी तेज है कि कांग्रेस का भ्रष्‍टाचारी पता नहीं कौन से फार्मूले से आपके पाले में आते ही सदाचारी बन जाता है. हम तो आपके और आपकी पार्टी के गणित से शुरू से ही बहुत प्रभावित रहे हैं. कभी-कभी अखबार में ई सब पढ़ने को मिल जाता है. पर, आधी जिंदगी बीत गई, ई गणित हम समझे नहीं पाए.

खैर, उम्‍मीद है कि आपके सेवाकाल में देश के भाजपा शासन वाले राज्‍यों की प्राइमरी शिक्षा तो सुधर चुकी होगी. टीचर अब मिड-डे-मिल, स्‍कूल बनवाने, वोटर लिस्‍ट बनवाने के कामों से मुक्‍त होकर केवल पढ़ाने में जुटे हुए होंगे. माध्‍यमिक और उच्‍च शिक्षा की गुणवत्‍ता भी बढ़ गई होगी, शोध के काम होने लगे होंगे. छात्र अब रिसर्च करके देश को आगे ले जा रहे होंगे आपके साथ मिलकर.

हम का करें, नया भारत में आने का तो बहुत मन करता है, फिर वहां से डिजिटल इंडिया में जाने का भी, लेकिन दिक्‍कत है कि हमको कम्‍प्‍यूटर बहुत नहीं आता है ना! कांग्रेस के दौर के प्राइमरी स्‍कूल में पढ़े हैं ना, कुछो बुझइबे नहीं करता है. जय शाह भाई की तरह हमरा लौंडा भी पढ़कर बिजनिस करना चाहता है, कमाना भी चाहता है, लेकिन संशाधन की कमी है तो ई वाला पढ़ाई पढ़ा ना पा रहे हैं.

अखबार में पढ़े रहे आप बुलेट ट्रेन देश में लियाने जा रहे हैं. मन बहुत प्रसन्‍न हुआ. लगा गरीबों के विकास के बारे में आपके अलावा कोई सोचे नहीं सकता है. गरीब बुलेट ट्रेन से चलते कितना अच्‍छा लगेगा. नोटबंदी के पचास दिन बादे आप नया भारत देने वाले थे, तभिए उम्‍मीद बंध गया था. आने का भी तभिए मन था, लेकिन पारिवारिक जिम्‍मेदारी के चलते टाइमे नहीं मिल पाया.

हमारा पुराना साथी भूखमरवा फोन पर बता रहा था कि आपने पुराने रेलवे को आधुनिक कर दिया है. रेलवे इतना आधुनिक हो गया है कि अब कहीं भी पटरी से नीचे भी उतरकर चलने लगा है. मन बहुत खुश हुआ कि चलो पटरी पर जाम होने की दशा में रेल अब खेतों से पास लेकर भी निकलने-चलने लगा है. सचमुच डिजिटल इंडिया कितना बदल गया है.

दोस्‍तवा इहो बता रहा था कि भारत के यात्रियों की लेट-लतीफी को ध्‍यान में रखते हुए आपने ट्रेनों को दस घंटा से लगायत चौबीस घंटा लेट चलवा रहे हैं ताकि कवनो गरीब की ट्रेन छूटे नहीं. ई सुनकर आप खातिर दिल में इज्‍जत बहुत बढ़ गया है. हमरा सीना चौड़ा हो गया है, लेकिन आपको जानकर दुख होगा कि बहुत कोशिश कर रहे हैं, लेकिन 56 इंच ना हो पा रहा.

खैर, सुने रहे पूरा रेलवे पहिले प्रभु भरोसे रहा अब कोई और के कस्‍टडी में हो गया है. सर, कस्‍टडी भले बदल जाए, लेकिन रेलवे को पटरी उतारकर चलाने का अपना प्रयास ना छोडि़एगा. उम्‍मीद इहो है कि नोटबंदी के बाद नक्‍सली सब खतम हो गया होगा. आतंकी सब बरबाद हो गया होगा. वापस लौटे काला धन से आप नए भारत का निर्माण कार्य पूरा कर चुके होंगे. भ्रष्‍टाचारी देश छोड़कर भाग गए होंगे या जेल के भीतर होंगे.

प्रधान सेवकजी, हमे त पूरा विश्‍वास है कि दामादजी अब तक जेल में होंगे. सुखराम, मुकुल रॉय जैसे भ्रष्‍टाचारी आपको देखकर कांपते होंगे. और हां, गंगाजी फिर इधर बुलाई रहीं कि नहीं आपको? अबकी बुलाएंगी तो हमहू को बता दीजिएगा, साथे नहा लेंगे. बहुत पाप चढ़ गया है हमरे ऊपर. बिना नहाए कटने वाला तो नहिए है. उम्‍मीद है कि गंगाजी अब पूरी तरह साफ सुथरी हो चुकी होंगी. बनारसो चमके रहा होगा.

उम्‍मीद का, इस मामले में तो पूरा विश्‍वास है कि आप पाकिस्‍तान को उसी की भाषा में जवाब दे दिए होंगे. हम बहुत खुश हैं कि आप उर्दू केतना मेनहत से सीखे होंगे. कइसे सीखे होंगे. खैर, हम भी पूरा चिरकूट हैं. अरे आप बद्रीनाथ, केदारनाथ आपदा के दौरान छोटा जहाज भेजकर बीस-बाइस हजार गुजरातियों को बचवा सकते हैं तो ई पाकिस्‍तान की भाषा सीखना कौन सी बड़ी बात है. खैर, अब बस, कम लिखा जादा समझिएगा. जल्दिये डिजिटल इंडिया में आकर आपको मिलता हूं.

आपका
अंधेरभक्‍त
चेखुर प्रसाद

इस व्यंग्य के लेखक अनिल सिंह दिल्ली में लंबे समय तक टीवी और वेब पत्रकारिता करने के बाद इन दिनों लखनऊ में ‘दृष्टांत’ मैग्जीन में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. उनसे संपर्क 09451587800 या [email protected] के जरिए कर सकते हैं.


भक्त

View all posts

Add comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Connect With Us

Advertisement