क्या सहारा वाले नकली देशभक्त हैं?

चरण सिंह राजपूत

साथियों

नकली देशभक्तों से सावधान होने की जरूरत … आज अखबार में सहारा प्रबंधन और कर्मियों को कश्मीर में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों को श्रंद्धाजलि देने के लिए कैंडिल मार्च निकालते देखा। यह वह संस्था है। जिसने कारगिल के नाम पर अपने ही कर्मचारियों को ठगा है। बिना कर्मचारियों की सहमति के 6 साल तक उनकी सेलरी से कारगिल के नाम पैसे काटे हैं। यह संस्था अपने परिवार में 10 लाख सदस्य बताती है। समझ लीजिए कितने रुपये प्रति माह कमाए होंगे।

इतना ही नहीं इसके मुखिया ने जेल से छुड़ाने के नाम पर भी अपने कर्मचारियों को ठग लिया। यह वह संस्था है जिसने 7 माह की बकाया सेलरी और मजीठिया वेज बोर्ड मांगने पर मीडिया में 70 के आसपास कर्मियों को टर्मिनेट कर दिया। यह वह संस्था है, जिसने गरीब जनता का अरबो खरबो रुपये मार रखा है। इस संस्था में परेशानियों को झेलते झेलते न जाने कितने कर्मियों ने आत्महत्या कर ली। कितने कर्मचारी अपने पैसों के लिए मारे मारे फिर रहे हैं। ये सब वे लोग हैं जिन्हें देश और समाज से कोई मतलब नहीं है। अब कुछ बात न बनी तो लगे सीआरपीएफ जवानों की शहादत को भुनाने।

जिन लोगों को देश और समाज की चिंता है। वे यह बात अच्छी तरह से समझ लें कि देश बहुत नाजुक दौर से गुजर रहा है। इसलिए नहीं कि हमें गैर खोखला कर रहे हैं। इसलिए कि देश के लिए लड़ने वाले लोग बहुत कम रह गए हैं। देश में नकली देशभक्ति की होड़ मच रही है। मरने के लिए किसान और उसका बेटा जवान है और देशभक्ति का ठेका वो लोग लिए घूम रहे हैं, जिन्हें न देश से मतलब है और न ही समाज से। जो लोग आजादी की लड़ाई का विरोध करते रहे। जो लोग देश की धर्मनिरपेक्ष बुनियाद को खोदते रहे। जो लोग जाति धर्म के नाम पर लोगों को लड़ाते रहे। जो लोग गरीबों को लूटकर अय्याशी करते रहे। वे आज देशभक्त हो गए हैं। जिन लोगों के बुजुर्गों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। जिन लोगों ने अपने बेटे को देश की सीमा पर लड़ने के लिए भेज रखे हैं और खुद रातदिन मेहनत कर लोगों का पेट भर रहे हैं। उनकी देशभक्ति किसी को नहीं दिखाई दे रही है।

कभी किसी ने यह जानने की कोशिश की है कि देश पर मर मिटने वाले क्रांतिकारियों के परिजन किस हालात में रह रहे हैं। दिखावे की देशभक्ति से काम नहीं चलेगा। देश पर मर मिटने के लिए तैयार होना होगा। कैंडिल जलाने से काम नहीं चलेगा। कैंडिल की लौ पर क्रांतिकारियों की तरह देश की रक्षा की शपथ लेनी होगी। वातानुकूलित कमरों में बैठकर सोशल मीडिया पर भावनाएं उड़ेलने से काम नहीं चलेगा। समाज में सच्ची देशभक्ति पैदा करने के लिए सड़कों पर उतरना होगा। मुस्लिम हिन्दू की जान का भूखा हो जाये और हिन्दू मुस्लिम की जान का भूखा। यह देशभक्ति नहीं है। देशभक्ति वह है कि हम सब मिलकर आतंकवाद, गरीबी, बेरोजगारी से लड़ें। देश को अब भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, सुभाष चंद्र बोस, खुदीराम बोस, अशफाक उल्ला खां जैसे क्रांतिकारियों की जरूरत है।

अभी भी असली देशभक्ति गांवों में ही है। जिन्हें ये नकली देशभक्त भूल बैठे हैं। जाने से कतराते हैं। इन्हीं गांवों के ये जवान हैं। जो सीमा पर मर रहे हैं। सीआरपीएफ जवानों का पार्थिव शरीर गांवों में ही आ रहा है। मतलब गांवों के जांबाज ही सीमा पर मोर्चा खोले हुए हैं। गांवों में जाकर इन जवानों के परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाने का समय किसी के पास नहीं है। कोई इन जवानों के लिए पेंशन की मांग करने को तैयार नहीं। ये नकली देशभक्त तो कई कई पेंशन ले रहे हैं। इन जवानों की पेंशन दिलवाने के कितने प्रयास इन लोगों ने किए हैं। कृपया बतलायें ? निश्चित रूप से पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खुलना ही चाहिए। साथ ही उन लोगों को भी खदेड़ा जाए जो अपने क्रियाकलापों से देश को खोखला कर रहे हैं और देशभक्ति का चोला ओढ़े घूम रहे हैं।

मैं इन नकली देशभक्तों से बता दूं कि हम भले ही इन जवानों को सैनिक लिख रहे हैं पर सरकारों ने तो इन्हें अर्धसैनिक ही मान रखा है। अब जरूरत पाकिस्तान के खिलाफ जंग के साथ ही नकली देशभक्तों से भी करनी होगी। किसान जवान के साथ ही मजदूर को भी एक होना होगा। नहीं तो ये नकली देशभक्त दिखावे की राजनीति कर देश की जनता की भावनाओं से खेलते रहेंगे।

CHARAN SINGH RAJPUT
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भक्त

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