शुक्रिया पाकिस्तान!

गोविंद गोयल

श्रीगंगानगर। सैल्यूट अभिनंदन को! एक बार नहीं, बार बार और हर बार सैल्यूट! सैल्यूट केवल शब्दों से नहीं बल्कि पूरे मन, कर्म और वचन से। सैल्यूट अभिनंदन! यह सैल्यूट उनको इसलिए कि उन्होने दुश्मन देश मेँ, वह भी उस दुश्मन देश मेँ, जो बदनाम है अपनी क्रूरता के लिए, आतंकवाद को पनपाने और उसे आसरा देने के लिहाज से, असीम धैर्य, विवेक, सहनशीलता और साहस दिखाने के लिए। नाजुक मौके पर बुद्धि और समझदारी से काम लेने के लिए।

जोश हमेशा ही तारीफ के काबिल होता है, लेकिन जोश होश मेँ ना हो तो फिर परिणाम भयावह भी हो सकते हैं। अभिनंदन ने होश मेँ रह जोश से काम लिया। सैल्यूट अभिनंदन को, पूरे होश मेँ अपना जोश जताने, दिखाने के साथ साथ उस मौके पर सहनशीलता, समझदारी और विवेक से पूरी स्थिति को हैंडल करने के लिए, जब वे पाक की जमीं पर पाक सेना के कब्जे मेँ थे। इसमें कोई शक नहीं कि पाक सेना को भी अपने पाकिस्तान से की मिट्टी से उतना ही प्रेम होगा, जितना अभिनंदन को अपनी मातृभूमि भारत की मिट्टी से। पाक अधिकृत कश्मीर मेँ पहुँचने से लेकर शुक्रवार की रात वतन लौटने की अवधि मेँ उनके अनेकानेक वीडियो सोशल मीडिया पर देखे गए।

बाघा-अटारी बार्डर पर उनकी लाइव देखा गया, अभिनंदन ने एक सच्चे, अच्छे, संस्कारी, निडर सिपाही का परिचय देते हुए दुश्मन देश के हर प्रतीक का सम्मान किया। उनके नियमानुसार चले। इन सबके लिए उनको सैल्यूट। एक बार नहीं अनेकानेक बार और हर बार। ये बात केवल अभिनंदन को सैल्यूट कहने मात्र से खत्म नहीं हो जाती। अब वो लिखा जाना है जिसके लिए लेखक को देशद्रोही, भारत का दुश्मन, राष्ट्रद्रोही की संज्ञा दी जा सकती है। वो शब्द हैं, शुक्रिया पाकिस्तान! थैंक्स पाक सेना! दुश्मन देश को शुक्रिया और थैंक्स इसलिए कि उन्होने विंग कमांडर अभिनंदन को भारत भेजा। भारत को लौटाया। अभिनंदन को भारत के हवाले किया। क्योंकि जिनसे सहृदयता, विनम्रता और बड़ेपन की उम्मीद नहीं की जा सकती और वह ऐसा कर दें तो उनको थैंक्स और शुक्रिया कहना बनता है।

बेशक पाक और पाक सेना ने यह सब भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी के डर से किया हो या जेनेवा समझौते के तहत या फिर अंतरराष्ट्रीय दवाब के चलते, लेकिन किया तो! अगर वो मोदी जी के डर से अभिनंदन को नहीं लौटाता तो क्या कर लेते! जेनेवा समझौता नहीं मानता तो जेनेवा उसका क्या बिगाड़ लेता! अंतरराष्ट्रीय दवाब की परवाह नहीं करता तो अंतरराष्ट्रीय सेना उस पर हमला तो नहीं कर देती ना! अभिनंदन के पाक सेना से लेकर उसे भारत वापिस शहीद हुए, इसमें ना तो मोदी जी के डर ने काम किया और ना जेनेवा समझौते ने।

अंतरराष्ट्रीय दवाब भी इन घटनाओं को नहीं रोक सका। बेशर्म, नापाक जैसे नामों से पुकारे जाने वाले देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने खुद भारतीय पायलट को सकुशल लौटाने की घोषणा संसद मेँ की। जब तक अभिनंदन ने भारत की धरती पर कदम नहीं धरा तब तक ना जाने कैसी कैसी आशंका हमारे दिलों मेँ आती रहीं। ऐसा इसलिए कि ये विश्वास करना मुश्किल था कि पाक उसे आसानी से छोड़ देगा। परंतु ऐसा हुआ, इसलिए पाक को शुक्रिया और उसकी सेना को थैंक्स! उन पाक नागरिकों का आभार, जिन्होने अभिनंदन की वतन वापसी के लिए आवाज उठाई, दुआ की।

तमाम शास्त्र यही कहते हैं कि अच्छे काम की सराहना सराहना होनी ही चाहिए। चाहे वह दुश्मन ने ही क्यों ना किया हो! और अंत मेँ यही कि जो सत्ता शांति के पैगाम को नहीं मानती, नहीं समझती और ऐसे संदेश को भेजने वाले की कायरता समझती है, वह सत्ता समाप्त हो जाती है। उसका नाश हो जाता है। विनाश हो जाता है। सब को ज्ञात है कि द्वापर मेँ ऐसा कौरवों के साथ हुआ और त्रेता युग मेँ रावण के साथ। अब चाहे ये बात पाक के शासकों पर लागू कर लो या भारत के शासकों पर। दो लाइन पढ़ो-

महफिल मेँ जिक्र जब तेरा हुआ
शर्म से लाल चेहरा मेरा हुआ।

लेखक गोविंद गोयल श्रीगंगानगर (राजस्थान) के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

भक्त

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