जेट एयरवेज के विमान उड़ते ताबूतों में बदल रहे हैं!

Girish Malviya : कुछ दिनों पहले एक पोस्ट में यह प्रश्न उठाया गया था कि क्या जेट एयरवेज के विमान उड़ते ताबूतों में बदल रहे हैं? यह बात खुद डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने अपने ऑडिट में स्वीकार की है. नवभारत टाइम्स के अनुसार एक सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘सैलरी न दिया जाना चिंता की बात है। डीजीसीए के ऑडिट में इसे टाइप 2 श्रेणी की चिंता बताया गया है।’ सूत्रों ने बताया कि एयरलाइन ने इस पर अभी अपना जवाब नहीं भेजा है।

पिछले दो महीनों से ज्यादा समय से अपने पायलटों, सीनियर इंजीनियरों और विमान चालक दल सहित सीनियर मैनेजमेंट (जनरल मैनेजर और ऊपर के अधिकारी) को सैलरी नहीं दे पा रही है। लेकिन DGCA इसे सिर्फ जेट के स्टाफ में वेतन से जोड़ कर देख रहा है लेकिन वास्तविक रूप में यह समस्या और गंभीर है

20 सितंबर को मुंबई-जयपुर की उड़ान 9W 697 मे जेट का पायलट वह स्विच ही एक्टिवेट करना भूल गया था, जिससे एयरक्राफ्ट में प्रेशर मेंटेन रहता है।इस घटना में विमान में सवार लोगो की जान जाते जाते बची लेकिन जब मीडिया ने इस बारे में पूछताछ करने की कोशिश की तो इस स्टोरी से जुड़े सवालों का जवाब जेट एयरवेज ने नहीं दिये.

30 सितंबर को हैदराबाद से चंडीगढ़ जा रही जेट एयरवेज की फ्लाइट का इंजन हवा में ही खराब हो गया जिसके बाद फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिग करानी पड़ी. इस फ्लाइट में 96 लोग सवार थे. जैसे ही फ्लाइट का इंजर खराब हुआ पायलट ने तुरंत इंदौर एयरपोर्ट पर फ्लाइट की सुरक्षित लैंडिग कराई.

26 दिसम्बर को बेंगलुरु में जेट एयरवेज ने विमान में धुआं निकलने के बाद उसमें बैठे 71 यात्रियों को दूसरे विमान से भेजना पड़ा. उसके पहले भी जेट एयरलाइंस के विमानों में ऐसी घटनाएं लगातार घट रही है लेकिन उसके बावजूद भी DGCA जेट के विमानों में सिक्योरिटी से संबंधित सवालों को लगातार नजर अंदाज कर रहा है. कहीं उसकी इस भूल की कीमत इंसानों की जानों से न चुकाना पड़ जाए?

इंदौर के विश्लेषक गिरीश मालवीय की एफबी वॉल से.

भक्त

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